रिटायरमेंट के बाद की लाइफ सिक्योर करना हर किसी का सपना होता है। जब सैलरी आना बंद हो जाए, तब खर्चे कैसे चलेंगे? इसी सवाल का जवाब है NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम)।
लेकिन सबके दिमाग में एक ही सवाल होता है: क्या NPS सच में सुरक्षित (Safe) है? क्या इसमें पैसा डूबने का रिस्क है? आइए इस आर्टिकल में NPS की हर डिटेल को आसान भाषा में समझते हैं।
NPS क्या है? (What is NPS?)
NPS एक सरकार द्वारा समर्थित रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है जो PFRDA (पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा रेगुलेट की जाती है। इसका मुख्य मकसद लोगों को रिटायरमेंट के बाद एक नियमित आय (Pension) देना है।
- कौन खुलवा सकता है: कोई भी भारतीय नागरिक (18 से 70 साल की उम्र तक)।
- स्ट्रक्चर: इसमें आप अपनी नौकरी के दौरान थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश करते हैं, जो मार्केट (इक्विटी/डेट) में लगाया जाता है। रिटायरमेंट (60 साल) पर आपको एक बड़ा अमाउंट मिलता है और बाकी अमाउंट मंथली पेंशन के रूप में।
NPS कैसे काम करता है? (Asset Classes)
NPS आपके पैसे को 4 जगह निवेश कर सकता है। आप खुद चुन सकते हैं कि पैसा कहाँ लगेगा:
- Equity (E): शेयर बाजार (हाई रिस्क, हाई रिटर्न)।
- Corporate Bonds (C): प्राइवेट कंपनियों के बॉन्ड (मध्यम रिस्क)।
- Government Securities (G): सरकारी बॉन्ड (लो रिस्क, सबसे सुरक्षित)।
- Alternative Assets (A): REITs वगैरह (बहुत हाई रिस्क, सिर्फ 5% तक सीमित)।
निवेश के विकल्प (Investment Choices):
- Active Choice: आप खुद तय करते हैं कि इक्विटी (Equity) में कितना % रखना है (मैक्सिमम 75% इक्विटी की अनुमति है)।
- Auto Choice: आपकी उम्र के हिसाब से ऑटोमैटिक एडजस्टमेंट होता है। जैसे-जैसे आप बूढ़े होते जाएंगे, इक्विटी (रिस्क) कम होता जाएगा और डेट (सुरक्षा) बढ़ता जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल: NPS सेफ है या रिस्क?
इसका जवाब “हाँ” और “ना” दोनों है। आइए इसे समझते हैं:
1. सुरक्षा फैक्टर (Safety Factor)
- रेगुलेटेड बॉडी: NPS को PFRDA मॉनिटर करता है, जो कि एक सरकारी संस्था है। इसलिए धोखाधड़ी (Fraud) का चांस ना के बराबर है।
- पारदर्शी (Transparent): आप रोज़ाना अपने निवेश की वैल्यू (NAV) चेक कर सकते हैं।
- कम लागत (Low Cost): NPS दुनिया के सबसे सस्ते निवेश प्रोडक्ट्स में से एक है (फंड मैनेजमेंट चार्ज बहुत कम है), जिससे आपका प्रॉफिट बढ़ता है।
2. रिस्क फैक्टर (Risk Factor)
- मार्केट लिंक्ड: NPS का पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड्स में लगता है। इसलिए, रिटर्न की गारंटी नहीं है (जैसे PPF या FD में फिक्स्ड ब्याज मिलता है, वैसा यहाँ नहीं है)।
- उतार-चढ़ाव (Volatility): अगर मार्केट नीचे गिरा, तो शॉर्ट-टर्म में आपका पैसा कम दिख सकता है। लेकिन लॉन्ग-टर्म (10-20 साल) में पुराना डेटा दिखाता है कि NPS ने PPF/FD से बेहतर रिटर्न दिए हैं (औसतन 8% से 12% के बीच)।
- Section 80C: ₹1.5 लाख तक का टैक्स डिडक्शन (PPF/ELSS के साथ मिलाकर)।
- Section 80CCD (1B):₹50,000 का एक्स्ट्रा डिडक्शन। (यह 80C के ऊपर मिलता है)।
- कुल टैक्स बेनिफिट: आप साल का ₹2 लाख तक टैक्स-फ्री निवेश कर सकते हैं।
- 60% पैसा: आप एक साथ निकाल सकते हैं (Lump sum)। यह पूरा अमाउंट टैक्स-फ्री होता है।
- 40% पैसा: आपको अनिवार्य रूप से किसी एन्युटी प्लान (इंश्योरेंस कंपनी) में डालना पड़ेगा। इस 40% अमाउंट से आपको ज़िंदगी भर मंथली पेंशन मिलेगी।
- नोट: जो मंथली पेंशन मिलेगी, वह टैक्सेबल इनकम मानी जाएगी।
NPS Tier I बनाम Tier II
NPS में दो तरह के अकाउंट होते हैं:
| फीचर (Feature) | Tier I अकाउंट | Tier II अकाउंट |
|---|---|---|
| स्टेटस | अनिवार्य (पहला अकाउंट) | वैकल्पिक (Add-on अकाउंट) |
| लॉक-इन (Lock-in) | 60 साल की उम्र तक लॉक | कभी भी पैसा निकाल सकते हैं |
| टैक्स बेनिफिट | मिलता है (₹2 लाख तक) | कोई टैक्स बेनिफिट नहीं (आम लोगों के लिए) |
| उद्देश्य (Purpose) | सिर्फ रिटायरमेंट के लिए | सेविंग्स / म्यूचुअल फंड की तरह |
फायदे और नुकसान: एक नज़र में
✅ फायदे (Pros)
- अनुशासन: लॉक-इन होने की वजह से रिटायरमेंट का पैसा बीच में खर्च नहीं होता।
- रिटर्न्स: PPF और FD से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है (लंबे समय में)।
- एक्स्ट्रा टैक्स सेविंग: ₹50,000 एक्स्ट्रा बचाने का मौका।
- कम लागत: मैनेजमेंट फीस बहुत कम है।
❌ नुकसान (Cons)
- लिक्विडिटी की समस्या: 60 साल से पहले पैसा निकालना मुश्किल है (कुछ खास कारणों जैसे बीमारी या घर लेने के लिए ही आंशिक निकासी की अनुमति है)।
- अनिवार्य एन्युटी: आप अपना पूरा 100% पैसा निकाल नहीं सकते। 40% की पेंशन लेनी ही पड़ेगी, भले ही उस समय रिटर्न कम मिल रहे हों।
- पेंशन पर टैक्स: रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मंथली पेंशन पर टैक्स लगता है।
निष्कर्ष: क्या आपको NPS लेना चाहिए?
अगर आप नौकरी करते हैं और आपके पास रिटायरमेंट के लिए कोई फिक्स्ड पेंशन प्लान नहीं है, तो NPS एक ज़रूरी निवेश है।
- अगर आप सुरक्षा (Safety) चाहते हैं: तो अपने पोर्टफोलियो में Debt (सरकारी/कॉरपोरेट बॉन्ड) का अनुपात ज़्यादा रखें।
- अगर आप युवा (Young) हैं: तो Equity (शेयर्स) में एक्सपोजर ज़्यादा रखें ताकि कंपाउंड इंटरेस्ट का फायदा मिले।
अंतिम बात: NPS उन लोगों के लिए बेस्ट है जो अनुशासित निवेश चाहते हैं और बुढ़ापे में किसी के आगे हाथ फैलाना नहीं चाहते।