क्या आपने कभी सोचा है कि जब बैंक आपको 10% ब्याज पर पर्सनल लोन या कार लोन का ऑफर देता है, तो उसकी EMI होम लोन (जो 8.5% पर है) से इतनी ज्यादा क्यों लगती है?
जवाब एक छोटे से शब्द में छुपा है जिसे बैंक अक्सर छोटे अक्षरों (fine print) में लिखते हैं: “Flat Rate”।
यह 10% का फ्लैट रेट सुनने में सस्ता लगता है, लेकिन गणित की दुनिया में यह 18% के रिड्यूसिंग रेट के बराबर है। आइए इस “ऑप्टिकल इल्यूजन” (नज़रों के धोखे) को डिकोड करते हैं।
1. यह खेल कैसे खेला जाता है? (The Math Behind the Lie)
सबसे पहले दोनों का अंतर समझते हैं:
- Reducing Balance Rate (घटता ब्याज): यह ईमानदार तरीका है। इसमें आपको सिर्फ उस रकम पर ब्याज देना होता है जो बकाया (outstanding) है। जैसे-जैसे आप EMI भरते हैं, आपका मूलधन (Principal) कम होता जाता है और ब्याज भी कम होता जाता है। (होम लोन अक्सर इसी पर मिलते हैं)।
- Flat Interest Rate (फ्लैट ब्याज): यह चालाकी वाला तरीका है। इसमें ब्याज की गणना पूरे मूलधन (Original Principal) पर होती है, चाहे आपने लोन का कितना भी हिस्सा चुका दिया हो। आप आखिरी EMI तक उस रकम पर ब्याज भरते हैं जो आपने सालों पहले चुका दी है।
2. दूध का दूध, पानी का पानी (Real Calculation)
चलिए एक उदाहरण से समझते हैं कि 10% असल में 18% कैसे बन जाता है।
मान लीजिए आप ₹1 लाख का लोन 3 साल (36 महीने) के लिए लेते हैं।
| विवरण (Parameter) | Flat Rate (10%) | Reducing Rate (10%) |
|---|---|---|
| ब्याज गणना (Calculation) | पूरे मूलधन पर (On Full Principal) | बची हुई राशि पर (On Outstanding) |
| मासिक किश्त (EMI) | ₹3,611 (महंगी) | ₹3,227 (सस्ती) |
| कुल ब्याज (Total Interest) | ₹30,000 | ₹16,161 |
| असली लागत (True Cost) | ~18% (छुपा हुआ सच) | 10% (पारदर्शी) |
| निष्कर्ष (Result) | ❌ महँगा विकल्प (Avoid) | ✅ सही विकल्प (Choose) |
👉 असली खेल:
अगर आप Flat Rate वाली EMI (₹3,611) को रिवर्स कैलकुलेट करें कि यह असल में कितने प्रतिशत ब्याज के बराबर है, तो पता चलता है कि Flat Rate का 10% असल में 17.9% (लगभग 18%) Reducing Rate के बराबर है!
3. बैंक ऐसा क्यों करते हैं? (The Psychology)
यह विशुद्ध रूप से Marketing Psychology है।
- सस्ता दिखने की होड़: एक आम ग्राहक जब दो ऑफर देखता है—एक जगह 10% (Flat) और दूसरी जगह 14% (Reducing)—तो वह बिना सोचे 10% वाले के पास भागता है। जबकि 14% वाला लोन वास्तव में बहुत सस्ता है।
- कैलकुलेशन में आसानी: सेल्स एजेंट के लिए आपको समझाना आसान होता है— “सर, 1 लाख का लोन है, 10 हज़ार ब्याज साल का, बस!” ग्राहक को यह सरलता पसंद आती है, लेकिन यह सरलता ही आपकी जेब काटती है।
4. आप इसे कैसे पहचानें? (How to Spot the Trap)
जब भी आप लोन लेने जाएं (खासकर पर्सनल लोन, कार लोन, या कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन), तो इन संकेतों (Red Flags) को देखें:
- अगर ब्याज दर बाजार से बहुत कम लग रही है (जैसे पर्सनल लोन 8-9% पर), तो सावधान हो जाएं।
- अगर ब्रोशर पर “Flat Rate” लिखा है।
- अगर बैंक एजेंट आपको Amortization Schedule (ब्याज और मूलधन का पूरा चार्ट) देने से कतरा रहा है।
5. अंगूठे का नियम (The Thumb Rule)
अगर आपको कभी जल्दी में यह चेक करना हो कि फ्लैट रेट का असली (Reducing) रेट क्या है, तो इस फार्मूले का इस्तेमाल करें:
Flat Rate x 1.83 ≈ Real Reducing Rate
उदाहरण:
- अगर फ्लैट रेट 10% है ➝ 10 \times 1.83 = 18.3\% (असली ब्याज)
- अगर फ्लैट रेट 8% है ➝ 8 \times 1.83 = 14.64\% (असली ब्याज)
निष्कर्ष (Conclusion)
बैंक झूठ नहीं बोलते, वे बस सच को गणित की परतों में छिपा देते हैं। अगली बार जब कोई लोन एजेंट कहे कि “सर, सिर्फ 9% ब्याज है,” तो उससे एक सीधा सवाल पूछें:
“यह Flat Rate है या Reducing Balance Rate?”
अगर जवाब “Flat” है, तो समझ जाइए कि आपको लगभग दोगुना ब्याज बताया जा रहा है। हमेशा Effective Annualized Rate (APR) पूछें, वही लोन की असली कीमत है।