सामान्यतः बॉन्ड्स में ब्याज दर (Coupon Rate) पूरे निवेश काल के लिए फिक्स होती है। लेकिन FRBs में ब्याज दर बाजार के बेंचमार्क से जुड़ी होती है।
- बेंचमार्क: इन बॉन्ड्स की दर National Savings Certificate (NSC) की ब्याज दर से जुड़ी होती है।
- ब्याज का निर्धारण: इसकी दर NSC की दर + 0.35% के स्प्रेड (अतिरिक्त लाभ) पर तय होती है।
2. मुख्य विशेषताएं (Key Features)
RBI Floating Rate Bonds vs. Fixed Deposit (FD)
| विशेषता (Feature) | RBI Floating Rate Bonds | Bank Fixed Deposit (FD) |
|---|---|---|
| ब्याज दर (Interest Rate) | बाजार के अनुसार बदलती रहती है (Floating) | पूरे कार्यकाल के लिए स्थिर (Fixed) |
| सुरक्षा (Safety) | सोवरेन गारंटी (सबसे सुरक्षित) | ₹5 लाख तक DICGC द्वारा सुरक्षित |
| अवधि (Tenure) | 7 साल (फिक्स्ड) | 7 दिन से 10 साल तक (लचीला) |
| समय से पहले निकासी | केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध | पेनल्टी के साथ कभी भी संभव |
| ब्याज भुगतान | हर 6 महीने में अनिवार्य | मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर विकल्प |
3. ब्याज दर कैसे काम करती है?
चूँकि यह ‘फ्लोटिंग’ है, इसलिए हर 6 महीने में ब्याज दर की समीक्षा की जाती है।
- अगर सरकार NSC की दरें बढ़ाती है, तो आपके बॉन्ड का ब्याज भी बढ़ जाएगा।
- अगर दरें घटती हैं, तो ब्याज कम हो जाएगा।
- वर्तमान में, यह दर आमतौर पर 8.05% के आसपास चल रही है (NSC दर 7.7% + 0.35%)।
4. किसे निवेश करना चाहिए?
- सुरक्षित निवेशक: जो शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर सरकारी गारंटी चाहते हैं।
- बढ़ती महंगाई से बचाव: जब महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी बढ़ती हैं। ऐसे में ये बॉन्ड्स आपको बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।
- वरिष्ठ नागरिक: उनके लिए समय-समय पर मिलने वाला ब्याज आय का अच्छा जरिया हो सकता है।
5. टैक्स और निकासी (Tax & Withdrawal)
- Income Tax: मिलने वाला ब्याज आपकी सालाना आय में जुड़ता है और आपके Tax Slab के अनुसार उस पर टैक्स लगता है।
- TDS: यदि ब्याज एक सीमा से अधिक है, तो बैंक TDS काट सकता है।
- समय से पहले निकासी: आमतौर पर 7 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। लेकिन वरिष्ठ नागरिकों (60+) के लिए 4 से 6 साल के बाद कुछ शर्तों के साथ समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा है।
6. इसमें निवेश कैसे करें?
आप किसी भी सरकारी बैंक (जैसे SBI, PNB) या प्रमुख प्राइवेट बैंक (HDFC, ICICI, Axis) की नेट बैंकिंग या शाखा में जाकर इन बॉन्ड्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह बॉन्ड्स Bond Ledger Account (BLA) के रूप में आपके पास रहते हैं।
प्रो टिप: अगर आपको लगता है कि भविष्य में ब्याज दरें गिरने वाली हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) बेहतर है। लेकिन अगर आपको लगता है कि दरें बढ़ेंगी, तो RBI Floating Rate Bonds एक स्मार्ट चॉइस है।