Growth Assets क्या है?

​Indian culture में Investment का मतलब अक्सर ‘Safety’ होता है। जब भी हम पैसे बचाने की बात करते हैं, तो हमारा पहला और स्वाभाविक विचार बैंक FD (Fixed Deposit) या Savings Account की तरफ जाता है। यह हमें मानसिक शांति देता है क्योंकि हमें लगता है कि हमारा पैसा बैंक में सुरक्षित है। लेकिन, Financial दुनिया की एक कड़वी सच्चाई यह है कि जिसे हम ‘Safety’ मान रहे हैं, वह वास्तव में हमारी संपत्ति को धीरे-धीरे कमजोर कर रहा है। यहीं पर हमें Growth Assets के concept को गहराई से समझने की जरूरत है, जो केवल पैसे बचाने के बारे में नहीं, बल्कि पैसे को काम पर लगाने के बारे में है।

सरल भाषा में कहें तो, Growth Assets वे Investments हैं जिनका मुख्य उद्देश्य समय के साथ आपकी Principal Amount (मूल पूंजी) को बढ़ाना है। जब आप Growth Assets—जैसे कि शेयर बाजार (Direct Equity), Equity Mutual Funds, Real Estate या कमर्शियल प्रॉपर्टी—में पैसा लगाते हैं, तो आप किसी को लोन नहीं दे रहे होते (जैसा कि FD में हम बैंक को देते हैं), बल्कि आप किसी बिजनेस या एसेट में हिस्सेदारी (Ownership) खरीद रहे होते हैं। जैसे-जैसे वह कंपनी प्रॉफिट कमाती है या इकोनॉमी आगे बढ़ती है, आपके Investment की वैल्यू भी बढ़ती जाती है। इनका लक्ष्य आपको फिक्स्ड ब्याज देना नहीं, बल्कि लंबी अवधि में जबरदस्त Wealth Creation करके देना है।

FD और Savings Account से बाहर निकलना क्यों जरूरी है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमें FD और Savings Account से बाहर क्यों देखना चाहिए? इसका सबसे प्रमुख कारण है—Inflation (महंगाई)। इसे एक ‘अदृश्य टैक्स’ समझें। मान लीजिए बैंक आपको FD पर 6% Interest दे रहा है, लेकिन मार्केट में Inflation Rate भी 6-7% है। इसका मतलब है कि एक साल बाद आपके पैसे की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन उस पैसे से सामान खरीदने की ताकत (Purchasing Power) उतनी ही रही या घट गई। Savings Account में तो स्थिति और भी खराब है, जहाँ पैसा पड़े-पड़े अपनी वैल्यू खोता रहता है। वास्तव में अमीर बनने के लिए हमें ऐसे Returns की जरूरत होती है जो Inflation को 4-5% के अंतर से हरा सके, और यह क्षमता केवल Growth Assets में है।

Compounding और Tax का गणित

इसके अलावा, FD का ब्याज आपकी Taxable Income में जुड़ता है, जिससे टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला Post-Tax Return बहुत कम रह जाता है। दूसरी ओर, Growth Assets में Power of Compounding का जादू काम करता है। FD में पैसा ‘Simple Interest’ की तरह बढ़ता है, जबकि Growth Assets में आपके मुनाफे पर भी मुनाफा मिलता है। Long Term में, यानी 5 या 10 साल में, यह अंतर बहुत बड़ा हो जाता है। इसलिए, फाइनेंशियल समझदारी यही कहती है कि FD का उपयोग केवल Emergency Fund के लिए करें, लेकिन भविष्य निर्माण और Wealth Creation के लिए अपने Portfolio का बड़ा हिस्सा Growth Assets में ही इन्वेस्ट करें।

Leave a Comment